Thursday, May 7, 2020

।। श्रीरामनामावली ।।

II श्रीराम समर्थ II

।। श्रीरामनामावली ।।
1  निर्गुणरूप  जय जय राम 
2  सगुणरुप  जय जय राम 
3  मत्स्यरूप   जय जय राम 
4 कूर्मरूप  जय जय राम 
5  वराहरूप   जय जय राम 
6 नरहरिरूप  जय जय राम 
7  वामनरूप  जय जय राम 
8  भार्गवरूप  जय जय राम 
9 रघुपतीरूप  जय जय राम 
10 रामकृष्णरूप  जय जय राम 
11 बौद्धरूप  जय जय राम 
12 कलंकीरूप  जय जय राम 
13 रघुपतीराघव   जय जय राम 
14 रविकुलमण्डन   जय जय राम 
15 दशरथनंदन   जय जय राम 
16 कौसल्यात्माज   जय जय राम 
17 जलदप्रभानिभ   जय जय राम 
18 राजीवलोचन   जय जय राम 
19 आजानुबाहू   जय जय राम 
20 अभयकरांबुज   जय जय राम 
21 कार्मुकपाणी   जय जय राम 
22 नरतनुधारी   जय जय राम 
23 सुरसाहकारी   जय जय राम 
24 धर्मसंस्थापक  जय जय राम 
25 करुणासागर   जय जय राम 
26 भक्तवत्सल   जय जय राम 
27 षड्रीपुभंजन   जय जय राम 
28 दीनदयानिधी   जय जय राम 
29 दोषनिवारण   जय जय राम 
30 पतितपावन    जय जय राम 
31 हृदयनिवासी   जय जय राम 
32 इंद्रियचालक   जय जय राम 
33  त्रैलोक्यपालक   जय जय राम 
34 भवभयहारक   जय जय राम 
35 भवविषशामक   जय जय राम 
36 निजसुखकारक   जय जय राम 
37 अखिलतीर्थाटन  जय जय राम 
38  वैराग्यवर्धक   जय जय राम 
39 गुरुपदरंजक   जय जय राम 
40 ज्ञानप्रकाशक  जय जय राम 
41  ऋषिमनतोषक  जय जय राम 
42  शस्त्रास्त्रग्राहक   जय जय राम 
43 ताटिकामर्दन  जय जय राम 
44  सुबाहुच्छेदक   जय जय राम 
45 मारिचत्रासक   जय जय राम 
46 गुरुमुखरक्षक   जय जय राम 
47 अहिल्योद्धारण   जय जय राम 
48  विदेहपावन    जय जय राम 
49  कोदंडभंजन   जय जय राम 
50 भूजावल्लभ   जय जय राम 
51 पराजितभार्गव   जय जय राम 
52 अयोध्यागामिन   जय जय राम 
53 पितृवचनांकित  जय जय राम 
54  राज्यत्यागिन   जय जय राम 
55 वल्कलाधारीन   जय जय राम 
56 गूहकपावन   जय जय राम 
57 जटाजूटशोभित  जय जय राम 
58  चित्रकूटवासिन   जय जय राम 
59 वायसपीडक  जय जय राम 
60  भरतकृपाकर  जय जय राम 
61  योगधारीन  जय जय राम 
62  अरण्यवासिन  जय जय राम 
63   विराधछेदक  जय जय राम 
64   मुनिजनरंजन  जय जय राम 
65   पंचवटीवासिन  जय जय राम 
66  फलमूलाशन  जय जय राम 
67  शंबरविदारण  जय जय राम 
68  शूर्पणखाविटंबन   जय जय राम 
69  खरादीमर्दना  जय जय राम 
70  भूसुरस्थापक   जय जय राम 
71 हेममृगांकित  जय जय राम 
72  जानकिविरह  जय जय राम 
73   लीलाविग्रह  जय जय राम 
74  जटायुपावन  जय जय राम 
75  कबंधमोचन   जय जय राम 
76 शबरीपूजित  जय जय राम 
77  हनुमज्जीवन  जय जय राम 
78  सुग्रीवप्रियकर  जय जय राम 
79  ताडच्छेदक  जय जय राम 
80  वालीमर्दन  जय जय राम 
81  ताराबोधक  जय जय राम 
82 अंगदपालक   जय जय राम 
83  रविसुतपालक  जय जय राम 
84  वनचरमित्र  जय जय राम 
85  सीतान्वेषण  जय जय राम 
86  हनुमत्प्रेषण  जय जय राम 
87  समुद्रगामीन  जय जय राम 
88  शरणागतरक्षक  जय जय राम 
89   फलमूलत्यागिन  जय जय राम 
90  कुशतल्पशायिन  जय जय राम 
91  जलनिधीशासन  जय जय राम 
92  ग्रावतारक  जय जय राम 
93  सेतुबंधन  जय जय राम 
94  सुवेलविहारी   जय जय राम 
95 सामकारक   जय जय राम 
96 अमोघबाण  जय जय राम 
97  राक्षसकंदन   जय जय राम 
98 कुंभकर्णविदारण    जय जय राम 
99 रिपुसुतभंजन   जय जय राम 
100 रावणमर्दन   जय जय राम 
101 बिभीषणस्थापन   जय जय राम 
102 सुरवरमोचन   जय जय राम 
103 जानकीसुखकर  जय जय राम 
104  विधिहरस्थापक  जय जय राम 
105  वानरजीवन  जय जय राम 
106  पुष्पकवाहन   जय जय राम 
107 भरततोषक   जय जय राम 
108 शरयूवासिन  जय जय राम 
109  अयोध्याधीश  जय जय राम 
110  राज्याभिषिक्त   जय जय राम 
111 अवनिजंक   जय जय राम 
112 हे शेषानुज  जय जय राम 
113  हे भरताग्रज  जय जय राम 
114  शत्रुघ्नबंधु   जय जय राम 
115 दासुनग्रह   जय जय राम 
116 सत्यभाषण  जय जय राम 
117  पत्नीकव्रत  जय जय राम 
118  साम्राज्यराजिन  जय जय राम 
119  षड्गुणैश्वर्य  जय जय राम 
120  सचिदानंद  जय जय राम 
121  हरिहरपावन  जय जय राम 
श्रीराम जयराम    जय जय राम 






जय जय रघुवीर समर्थ !

Friday, December 20, 2013

श्लोक २०५

||श्रीराम समर्थ ||

मनाची शते ऐकता दोष जाती।
मतीमंद ते साधना योग्य होती॥
चढे ज्ञान वैराग्य सामर्थ्य अंगी।
म्हणे दास विश्वासत मुक्ति भोगी॥२०५॥


जय जय रघुवीर समर्थ !  जय जय रघुवीर समर्थ !  जय जय रघुवीर समर्थ !

Friday, December 13, 2013

श्लोक २०४

||श्रीराम समर्थ ||

मना संग हा सर्वसंगास तोडी।
मना संग हा मोक्ष तात्काळ जोडी॥
मना संग हा साधना शीघ्र सोडी।
मना संग हा द्वैत निःशेष मोडी॥२०४॥

जय जय रघुवीर समर्थ !

Friday, December 6, 2013

श्लोक २०३


||श्रीराम समर्थ ||

मना सर्वही संग सोडूनि द्यावा।
अती आदरे सज्जनाचा धरावा॥
जयाचेनि संगे महादुःख भंगे।
जनी साधनेवीण सन्मार्ग लागे॥२०३॥

जय जय रघुवीर समर्थ !

Friday, November 29, 2013

श्लोक २०२


मना गुज रे तूज हे प्राप्त झाले।
परी अंतरी पाहिजे यत्न केले॥
सदा श्रवणे पाविजे निश्चयासी।
धरी सज्जनसंगती धन्य होसी॥२०२॥

जय जय रघुवीर समर्थ !

Friday, November 22, 2013

श्लोक २०१

||श्रीराम समर्थ ||

कदा ओळखीमाजि दूजे दिसेना।
मनी मानसी द्वैत काही वसेना॥
बहूता दिसा आपली भेट जाली।
विदेहीपणे सर्व काया निवाली॥२०१॥

जय जय रघुवीर समर्थ !

Friday, November 15, 2013

श्लोक २००

||श्रीराम समर्थ ||

कळे आकळे रुप ते ज्ञान होता।
तेथे आटली सर्वसाक्षी अवस्था॥
मना उन्मनी शब्द कुंठीत राहे।
तो रे तोचि तो राम सर्वत्र पाहे॥२००॥

जय जय रघुवीर समर्थ !

Friday, November 8, 2013

श्लोक १९९

||श्रीराम समर्थ ||

अती जीर्ण विस्तीर्ण ते रुप आहे।
तेथे तर्कसंपर्क तोही न साहे॥
अती गुढ ते दृश्य तत्काळ सोपे।
दुजेवीण जे खुण स्वामिप्रतापे॥१९९॥


जय जय रघुवीर समर्थ !
 

Friday, November 1, 2013

श्लोक १९८

||श्रीराम समर्थ ||


नभे व्यापिले सर्व सृष्टीस आहे।
रघूनायका ऊपमा ते साहे॥
दुजेवीण जो तोचि तो हा स्वभावे।
तया व्यापकू व्यर्थ कैसे म्हणावे॥१९८॥

जय जय रघुवीर समर्थ !

Friday, October 25, 2013

श्लोक १९७

||श्रीराम समर्थ ||


नभासारिखे रुप या राघवाचे।
मनी चिंतिता मूळ तुटे भवाचे॥
तया पाहता देहबुद्धी उरेना।
सदा सर्वदा आर्त पोटी पुरेना॥१९७॥


जय जय रघुवीर समर्थ !